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Shri Kurma Stotram | श्री कूर्म स्तोत्रम् | Kurma Stotra With Lyrics | #kurma

2024-05-23 6 Dailymotion

Shri Kurma Stotram | श्री कूर्म स्तोत्रम् | Kurma Stotra With Lyrics | #kurma @Mere Krishna <br /><br />#kurma #kurmaavatar #narayan #stotram <br /><br />श्री कूर्म स्तोत्र:<br /><br />नमामि ते देव पदारविन्दं प्रपन्नतापोपशमातपत्रम्।<br />यन्मूलकेता यतयोऽञ्जसोरु संसारदुःखं बहिरुत्क्षिपन्ति॥१॥<br /><br />धातर्यदस्मिन्भव ईश जीवास्तापत्रयेणोपहता न शर्म।<br />आत्मन्लभन्ते भगवंस्तवाङ्घ्रि च्छायां सविद्यामत आश्रयेम॥२॥<br /><br />मार्गन्ति यत्ते मुखपद्मनीडैश्छन्दःसुपर्णैर्-ऋषयो विविक्ते।<br />यस्याघमर्षोदसरिद्वरायाः पदं पदं तीर्थपदः प्रपन्नाः॥३॥<br /><br />यच्छ्रद्धया श्रुतवत्या च भक्त्या सम्मृज्यमाने हृदयेऽवधाय।<br />ज्ञानेन वैराग्यबलेन धीरा व्रजेम तत्तेऽङ्घ्रिसरोजपीठम्॥४॥<br /><br />विश्वस्य जन्मस्थितिसंयमार्थे कृतावतारस्य पदाम्बुजं ते।<br />व्रजेम सर्वे शरणं यदीश स्मृतं प्रयच्छत्यभयं स्वपुंसाम्॥५॥<br /><br />यत्सानुबन्धेऽसति देहगेहे ममाहमित्यूढदुराग्रहाणाम्।<br />पुंसां सुदूरं वसतोऽपि पुर्यां भजेम तत्ते भगवन्पदाब्जम्॥६॥<br /><br />तान्वै ह्यसद्वृत्तिभिरक्षिभिर्ये पराहृतान्तर्मनसः परेश।<br />अथो न पश्यन्त्युरुगाय नूनं ये ते पदन्यासविलासलक्ष्म्याः॥७॥<br /><br />पानेन ते देव कथासुधायाः प्रवृद्धभक्त्या विशदाशया ये।<br />वैराग्यसारं प्रतिलभ्य बोधं यथाञ्जसान्वीयुरकुण्ठधिष्ण्यम्॥८॥<br /><br />तथापरे चात्मसमाधियोग बलेन जित्वा प्रकृतिं बलिष्ठाम्।<br />त्वामेव धीराः पुरुषं विशन्ति तेषां श्रमः स्यान्न तु सेवया ते॥९॥<br /><br />तत्ते वयं लोकसिसृक्षयाद्य त्वयानुसृष्टास्त्रिभिरात्मभिः स्म।<br />सर्वे वियुक्ताः स्वविहारतन्त्रं न शक्नुमस्तत्प्रतिहर्तवे ते॥१०॥<br /><br />यावद्बलिं तेऽज हराम काले यथा वयं चान्नमदाम यत्र।<br />यथोभयेषां त इमे हि लोका बलिं हरन्तोऽन्नमदन्त्यनूहाः॥११॥<br /><br />त्वं नः सुराणामसि सान्वयानां कूटस्थ आद्यः पुरुषः पुराणः।<br />त्वं देव शक्त्यां गुणकर्मयोनौ रेतस्त्वजायां कविमादधेऽजः॥१२॥<br /><br />ततो वयं सत्प्रमुखा यदर्थे बभूविमात्मन्करवाम किं ते<br />त्वं नः स्वचक्षुः परिदेहि शक्त्या देव क्रियार्थे यदनुग्रहाणाम्॥१३॥

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